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Thursday, January 12, 2023

गंगा विलास क्रूज़: जानिए क्या है ख़ास और बिहार में क्यों हो रहा है विरोध

 

गंगा विलास क्रूज़: जानिए क्या है ख़ास और बिहार में क्यों हो रहा है विरोध

गंगा विलास क्रूज़: जानिए क्या है ख़ास और बिहार में क्यों हो रहा है विरोध

13 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल माध्यम से दुनिया के सबसे लंबे क्रूज़ 'गंगा विलास' को हरी झंडी दिखाएंगे. गंगा विलास क्रूज़ वाराणसी के रविदास घाट से रवाना होगी और बिहार बंगाल के रास्ते बांग्लादेश के रास्ते होते हुए असम के डिब्रूगढ़ पहुंचेगी. पूरी यात्रा कुल 51 दिनों की होगी.

लेकिन क्रूज़ की यात्रा के शुरू होने से पहले ही बिहार में इसका विरोध होने लगा है.

बिहार में सत्ताधारी जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने आरोप लगाया है कि 'गंगा विलास क्रूज़ चलाना जनता के पैसे की लूट है.'

ललन सिंह ने कहा है कि 'हर साल क्रूज़ चलाने के लिए गंगा नदी में जमा गाद को साफ़ किया जाएगा और फिर बाढ़ में इसमें गाद भरेगा.

'लेकिन केंद्र सरकार गंगा विलास क्रूज़ का प्रचार ज़ोर शोर से कर रही है और विश्वस्तरीय सुविधाओं का दावा कर रही है.

यह यात्री जहाज़ भारत और बांग्लादेश के 27 रिवर सिस्टम और सात नदियों- गंगा, भागीरथी, मेघना, हुगली, जमुना, पदमा और ब्रह्मपुत्र से होकर गुज़रेगा. इस यात्रा से 50 पर्यटन स्थल आपस में जुड़ेंगे.

इससे पहले 11 जनवरी को 56 घंटे की यात्रा के बाद उत्तर प्रदेश के बलिया से ये जहाज़ वाराणसी पहुंच गया था.

क्रूज़ के निदेशक राज सिंह का कहना है कि ये अकेला ऐसा जहाज़ है जो स्वदेशी तकनीक और फ़र्नीचर से लैस है.

क्रूज़ को भारत की ही आर्ट हिस्टोरियन डॉ अन्नपूर्णा गर्रीमाला ने डिज़ाइन किया है.

क्रूज़ की विशेषताएं

क्रूज़ की विशेषताएं


ये विशेष जहाज़ कोलकाता के पास एक शिपयार्ड में तैयार किया गया है. जहाज़ तो 2020 में ही तैयार हो गया था, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इसका उद्घाटन नहीं हो पाया था.

लग्ज़री सुख-सुविधाओं से लैस इस क्रूज़ में हर वो आधुनिक सुख सुविधा मौजूद है, जिसकी दरकार किसी सफ़र में हो सकती है.

62.5 मीटर लंबे, 12.8 मीटर चौड़े और 1.35 मीटर गहरे इस तीन मंज़िला जहाज़ में कुल 18 सूट यानी लग्ज़री कमरे हैं.

कमरे में कनवर्टिबल बेड, फ्रेंच बालकनी, एयर कंडिशनर, सोफा, एलइडी टीवी, स्मोक अलार्म, अटैच बाथरूम जैसी तमाम सुविधाएं हैं.

जहाज़ पर जिम, स्पा, आउटडोर ऑब्जर्वेशन डेक, निजी बटलर सेवा और यात्रियों के लिए विशेष संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी इंतज़ाम है.

क्रूज़ के इंटीरियर को देश की संस्कृति और हेरिटेज को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है.

क्रूज़ का रूट

क्रूज़ का रूट

13 जनवरी को वाराणसी से रवाना होने के 51 दिनों बाद ये जहाज़ एक मार्च को असम के डिब्रूगढ़ पहुंचेगा.

इस दौरान यह भारत के 5 राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और साथ ही बांग्लादेश से होकर गुज़रेगा. जहाज़ बांग्लादेश में 15 दिनों तक रुकेगा.

इसके अलावा इस पूरी यात्रा में अलग-अलग राज्यों के कुल 50 टूरिस्ट स्पॉट्स का भी लुत्फ़ पर्यटक उठा सकेंगे. इनमें विश्व धरोहर स्थल, नेशनल पार्क, नदियों के घाट और अन्य जगहें शामिल होंगी.

पचास हज़ार रुपये का टिकट

दुनिया के सबसे लंबी रिवर क्रूज़ की पहली सबसे लंबी यात्रा के गवाह स्विट्जरलैंड के 32 पर्यटक बनेंगे. जहाज़ में कुल 36 यात्रियों के रहने की सुविधा है.

माना जा रहा है कि गंगा विलास क्रूज़ की शुरुआत के बाद देश के रिवर क्रूज़ पर्यटन को काफ़ी बढ़ावा मिलेगा.

टिकट की कीमत की बात करें तो प्रति दिन प्रति व्यक्ति क़रीब 50 हज़ार रुपये का ख़र्च आएगा. लेकिन सभी को 51 दिनों के लिए बुक करना अनिवार्य नहीं होगा. यात्री चाहें तो बीच में कहीं भी इस सफ़र को छोड़ सकते हैं.

क्रूज़ के निदेशक राज सिंह ने बीबीसी को बताया कि अगले दो साल के लिए लगभग सभी टिकटें पहले ही बुक हो चुकी हैं.

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल का कहना है कि उद्घाटन के साथ ही लोग ज़्यादा से ज़्यादा इसमें अपनी दिलचस्पी दिखाएंगे और यह पर्यटकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय साबित होगा.

मंत्री ने कहा कि पर्यटन के इस क्षेत्र को विकसित करने से रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे.

सोनोवाल ने इस क्रूज़ के बारे में बताया, "ये आत्मनिर्भर भारत का ही उदाहरण है. ये जहाज हमारे देश में ही बना है. जहाज के इंटीरियर को सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रख कर बनाया गया है."

सोनोवाल के मुताबिक इस क्रूज़ के सभी यात्री स्विट्ज़रलैंड से हैं.

वहीं प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि गंगा विलास हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और भारत की विविधता के खूबसूरत पहलुओं की खोज़ करने का एक अनूठा अवसर देता है.

बिहार में विरोध

क्रूज़ के शुरू होने के साथ ही इस पर विवाद शुरू हो गया है.

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा है कि गंगा नदी में गाद का पहाड़ जमा है. उन्होंने यहां तक कहा है कि इस तरह की योजना हम बिहार में नहीं चलने देंगे.

बीजेपी ने ललन सिंह को विकास विरोधी बताया है लेकिन बिहार सरकार में जेडीयू की साझेदार आरजेडी ने उनका समर्थन किया है.

बीजेपी के बयान पर ललन सिंह ने कहा, "मैंने गंगा के विरोध में कोई बयान नहीं दिया है. गंगा में जमा गाद को साफ़ करने के लिए जहाज चलाना पैसे की बर्बादी है. गाद का प्रबंधन ज़्यादा ज़रूरी है."

दरअसल गंगा नदी में हर साल आने वाली बाढ़ से गाद जमा हो जाती है. गंगा में गाद की इस समस्या पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कई बार बोल चुके हैं.

गंगा विलास क्रूज़ बक्सर के पास बिहार में प्रवेश करेगा.

बिहार में गंगा नदी में गाद की समस्या पटना से आगे झारखंड के साहेबगंज तक बहुत ज़्यादा है.

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