ह्यूमन राइट्स वॉच ने मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर की भारत की कड़ी आलोचना
अंतरराष्ट्रीय संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी वैश्विक रिपोर्ट में कहा है कि भारत सरकार ने एक्टिविस्ट समूहों और मीडिया पर हमले तेज़ कर दिए हैं.
ह्यूमन राइट्स वॉच ने 100 से ज़्यादा देशों में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर अपनी वैश्विक रिपोर्ट जारी की है.
712 पन्नों की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने मुसलमान और अन्य अल्पसंख्यकों को दबाने के लिए अपमानजनक और भेदभावपूर्ण नीतियां अपनाई हैं.
रिपोर्ट कहती है, ''पूरे भारत में एक्टिविस्ट, पत्रकारों और सरकार के अन्य आलोचकों को राजनीतिक कारणों से आपराधिक मामलों में गिरफ़्तार किया जा रहा है. इसमें आतंकवाद संबंधी मामले भी हैं. प्रशासन आयकर छापों, वित्तीय अनियमितताओं को आरोपों और विदेशी अंशदान विनियम अधिनियम के ज़रिए मानवाधिकारों के लिए काम करने वालों को परेशान कर रहा है.''
''बीजेपी शासित राज्यों में प्रशासन ने मुसलमानों के घर और संपत्तियां तोड़ी हैं और ये कदम बिना क़ानूनी वैधता या प्रक्रिया के तहत उठाया गया है. ऐसा विरोध प्रदर्शन या कथित अपराधों की सज़ा के तौर पर किया गया है.''
ह्यूमन राइट्स वॉच की दक्षिण एशियाई निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा, ''बीजेपी सरकार का हिंदू बहुसंख्यकवादी विचारधारा को बढ़ावा देने से प्रशासन और उनके समर्थकों धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसात्मक कार्रवाई कर रहे हैं. अधिकारियों को आलोचकों को जेल भेजने के बजाय उत्पीड़न करने वाले पार्टी के सदस्यों और समर्थकों पर लगाम लगानी चाहिए.''
इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ईसाइयों को निशाना बनाने के लिए जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने को लेकर क़ानून बनाए गए हैं.
इसमें बिलकिस बानो के मामले का भी ज़िक्र है. बताया गया है, ''2002 के दंगों के दौरान एक गर्भवती मुसलमान महिला के गैंगरेप के मामले में11 हिंदुओं को सजा पूरी होने से पहले ही रिहा कर दिया गया. उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली थी.''
साथ ही लिखा है कि जम्मू-कश्मीर का स्वायत्त दर्जा हटाने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के तीन सालों बाद भी अभिव्यक्ति की आज़ादी, शांतिपूर्ण सभाओं और अन्य अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं.
इस रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के 'टू फिंगर टेस्ट या वर्जिनिटी टेस्ट' पर प्रतिबंध लगाने के फ़ैसले का भी ज़िक्र किया गया है.
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